तीन सरकार और दस साल, मेट्रो के सैकंड फेज की डीपीआर में अब तीसरी बार हाेगा बदलाव


शहर में चांदपाेल से मानसरोवर के बीच अधिकारियों ने पांच साल में मेट्रो में लाेगाें सफर करा दिया था। अब छह साल में चांदपाेल से बड़ी चाैपड़ के बीच चार महीने बाद मेट्रो शुरू हाेने वाली है। जबकि दूसरी तरफ दस साल में भी अधिकारी सैकंड फेज की डीपीआर तक काे फाइनल नहीं कर पा रहे हैं। सैकंड फेज की शुरूआत में डीपीआर वर्ष 2010 में 10 हजार 400 कराेड़ की लागत के साथ डीएमआरसी ने बनाई थी। अब अाठ साल में तीसरी बार डीपीआर काे नया रूप देने की तैयारी की जा रही है।

वर्ष 2016 में बीजेपी सरकार ने नए सीरे से डीपीआर बनाने के लिए फ्रांस की कंपनी काे 6 कराेड़ रुपए में टेंडर दिया था। कंपनी समय डीपीआर नहीं पाई अाैर भाग गई। कांग्रेस सरकार में सैकंड फेज की अास जगी है। मेट्राे ने अब वापस से डीपीआर रिव्यू करने के लिए डीएमआरसी काे पत्र लिखा हैं। इसमें करीब 3 कराेड़ रुपए खर्च हाेंगे। यानी दस साल में मेट्रो के सैकंड फेज की डीपीआर में ही करीब 10 कराेड़ रुपए खर्च हाे जाएंगे।
पहली डीपीआर में थे 23 किमी में 18 मेट्राे स्टेशन :
शुरूअात में कांग्रेस सरकार में वर्ष 2010 में बनी डीपीआर के तहत मेट्राे के सैकंड फेज सीतापुरा से अंबाबाड़ी तक बनना था। इसकी 23 किमी की दूरी में करीब 18 मेट्राे स्टेशन प्रस्तावित थे। इमसें से सात मेट्राे स्टेशन अंडरग्राउंड थे। कांग्रेस सरकार के बाद बीजेपी ने इसमें रुचि नहीं ली। तीन साल बाद डीपीआर काे रिव्यू के लिए फ्रांस की कंपनी काे टेंडर दे दिया। कंपनी छाेड़ गई। डीएमआरसी काे रिव्यू के लिए दी जा रही है।