जयपुर / शहर में निकली तिरंगा सद्भावना व शहीद सम्मान रैली, परमिशन नहीं लेने पर आयोजकों के खिलाफ केस दर्ज

राजधानी में रविवार को तिरंगा सद्भावना एवं शहीद सम्मान रैली का आयोजन हुआ। यह रैली रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल से सुबह करीब 10 बजे रवाना होकर विधानसभा के समीप अमर जवान ज्योति तक पहुंची। रैली में सैंकड़ों की संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। जो कि दुपहिया व अन्य वाहनों में तिरंगा झंडा हाथों में लेकर नारेबाजी करते नजर आए।

वहीं, पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय की बिना परमिशन के रैली निकालने पर लालकोठी थानाप्रभारी रायसल सिंह की तरफ से रैली आयोजकों सुमित खंडेलवाल व आलोक खंडेलवाल सहित करीब एक दर्जन लोगों के खिलाफ आईपीसी 143, 150,188,189,283 सहित 4/6 आरएनसी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवाया गया। इसकी जांच एएसआई हरबंस सिंह को सौंपी गई है।

नामजद अन्य लोगों में भाजपा नेता मंजू शर्मा, रिटायर्ड पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह शेखावत, राजेंद्र मीणा, महेश भारद्वाज, मधु शर्मा, राहुल मंगल, उपेंद्र शास्त्री, वीरेंद्र राणा, मिनल शर्मा, आकृति तिवाड़ी, पूनम शर्मा, प्रशांत श्रीमाल, ओमप्रकाश सैनी, सोमकांत शर्मा, सुनील हिंदुस्तानी व अन्य है।

रिपोर्ट में थानाप्रभारी रायसल सिंह ने बताया कि पुलिस कंट्रोल रूम से सुबह करीब पौने 9 बजे अल्बर्ट हॉल से तिरंगा रैली निकालने की सूचना मिली थी। तब वे पुलिस जाब्ता लेकर वहां पहुंचे। तब करीब डेढ़ सौ-दो सौ लोग मौजूद थे। तब थानाप्रभारी रायसल सिंह ने अल्बर्ट हॉल व रामनिवास बाग क्षेत्र रैली व धरने के लिए हाइकोर्ट के आदेशानुसार प्रतिबंधित होने का हवाला दिया।

लेकिन आयोजनकर्ताओं ने समझाइश दरकिनार कर रैली निकाली। इस पर थानाप्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई। वहीं, मुख्य आयोजनकर्ता सुमित खंडेलवाल ने शनिवार को एक प्रेसवार्ता में कहा था कि उन्होंने शहर में सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित करने के उद्देश्य से सूरजपोल अनाज मंडी, गलतागेट से अमर जवान ज्योति तक 13 अक्टूबर को तिरंगा सद्भावना रैली निकाला जाना प्रस्तावित था।

करीब 20 दिन पहले इसकी लिखित सूचना पुलिस को दे दी थी। तब पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने आयोजकों को रैली का मार्ग बदलने को कहा। हमने इसकी सहमति दे दी। इसके बाद एनवक्त पर कमिश्नरेट पुलिस ने शुक्रवार को रैली निकालने की इजाजत देने से इंकार कर दिया। सुमित व आलोक का कहना था कि यह रैली गैर राजनीतिक थी। जिसमें शहीदों के परिवारों का सम्मान किया जाना था।

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