महाभारत की लडाई से संबंध है इस शक्तिपीठ का



भारत में कई जगहें हैं, जो ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों नजरिए से महत्व रखती है। जिसका प्राचीन समय में कुछ न कुछ महत्व रखते हैं। आज हम हरियाणा के प्रसिद्ध स्थल कुरुक्षेत्र में स्थित देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ के बारे में बता रहें हैं।

कुरुक्षेत्र में देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ है। इसका संबंध महाभारत के समय से है। जिस समय महाभारत का युद्ध होने वाला था उस समय से इस इस मंदिर का संबंध है।

इस मंदिर के विषय में एक ओर मान्यता है कि देवी सती ने जब यज्ञ में कूद कर आत्मदाह किया था उसके बाद भगवान शिव देवी सती के देह को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तब भगवान विष्णु ने देवी सती के प्रति भगवान शिव के मोह को तोड़ने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को 52 हिस्सों में बांट दिया था। जिस जिस स्थान पर देवी सती के शरीर का जो हिस्सा गिरा वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना हुई।

इस क्रम में कुरुक्षेत्र में देवी सती का दायां पैर के घुटने से नीचे वाला भाग गिरा था। जिस कारण से यहा पर एक शक्तिपीठ की स्थापना हुई। इसके साथ साथ इस स्थान के लिए मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन भी इस स्थान पर हुआ है।

महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस मंदिर में देवी भद्रकाली की पूजा करने को कहा था जिससे महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्त हो। इस स्थान पर अर्जुन ने देवी की पूजा कर युद्ध में जीतने के बाद घोड़ा चढ़ाने का प्रण लिया था। उस समय से ही इस मंदिर में मान्यता है कि मन्नत पूरी होने के बाद यहां पर सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढ़ाएं जाते हैं। ये परंपरा अभी भी प्रचलित है।