डेढ़ और ढाई साल के दो बच्चों को कमरे में जंजीर से बांध मां-बाप चले गए दूसरे गांव, रोटियां बनाकर छोड़ गए


(सीकर). अपने दो मासूम बेटों को कमरे में जंजीर से बांधकर माता-पिता गोगामेड़ी चले गए। मासूमों की उम्र महज डेढ़ और ढाई साल है। पड़ोसियों ने जब इनके रोने की आवाज सुनी तो दोनों को बाहर निकाला, लेकिन दिनभर कमरे में बंद रहने और भूख प्यास के कारण इनकी तबियत बिगड़ गई। दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। देर रात इनके माता-पिता वापस लौटे।

रोने की आवाज सुन पड़ोसियों ने निकाला
शाहपुर तन सिंघाना निवासी महेंद्र वाल्मीकि और उसकी पत्नी रेखा नट बस्ती में बहनोई विजय व बहन पूजा के साथ रहते हैं। रेखा पालिका क्षेत्र में सफाई का काम करती है। गुरुवार को रेखा व उसका पति महेंद्र अपने छह साल के बेटे को लेकर गोगामेड़ी गए। ये लोग अपने डेढ़ व ढाई साल के दो बच्चों को कमरे में एक चारपाई पर जंजीर से बांधकर चले गए। शाम करीब सात बजे पड़ोसियों ने मोहल्ले के विजय वाल्मीकि के घर से बच्चों के रोने की आवाज सुनी तो अंदर झांककर देखा, जहां दोनों बच्चे जंजीर से बंधे नजर आए। इस पर कुछ पड़ोसी अंदर घुसे और दोनों बच्चों को बाहर निकाला।

शरीर में हो गई थी पानी की कमी

पड़ोसियों के अनुसार दोनों बच्चे दोनों बच्चे अर्द्ध मूर्छित अवस्था में थे। लोगों ने बच्चों का दूध व पानी पिलाया। इस बीच सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने विजय वाल्मीकि को नंबर लेकर फोन किया। उसकी पत्नी ने बताया कि वे भादरा के नजदीक गोगामेड़ी से वापस लौट रहे हैं, रास्ते में हैं। इसके बाद कांस्टेबल श्रवण कुमार ने बच्चों को सीएचसी पहुंचाया। वहां प्रभारी डाॅ. जितेंद्र यादव और शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनिल लांबा ने बच्चों को संभाला। प्रारंभिक जांच में पता चला कि बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो गई थी।

एक डेढ़ साल का, दूसरा ढाई का
सीएचसी के डाॅक्टरों ने बताया कि इनमें एक बच्चा डेढ़ साल का और दूसरा करीब ढाई साल है। दोनों को कई घंटे से पानी या दूध नहीं मिलने से उनके शरीर में पानी की कमी हो गई। उनका उपचार किया जा रहा है, जल्दी ही रिकवर कर लेंगे।

दूध पीते बच्चों के पास रोटियां बना कर छोड़ गए थे मां-बाप
चाैंकाने वाली बात ये है कि ये माता पिता इन दूध पीते बच्चों को चारपाई पर जंजीर से बांधकर इनके पास रोटियां बनाकर रखकर गए। ये लोग करीब डेढ़ सौ किमी दूर गोगामेड़ी गए। इसके लिए इन्हें सवेरे जल्दी निकलना पड़ा और ये देर रात वापस लौटते। यह सब जानते हुए भी बच्चों को इस तरह से छोड़कर जाना हर किसी के समझ से परे था। देर रात अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद बच्चों की हालत में सुधार हुआ।