दो बांध… भाखड़ा लबालब, पौंग डैम को भरने की चिंता


बीकानेर। भाखड़ा बांध में पानी ज्यादा आने को लेकर जो अधिकारी चिंतित हैं वही अधिकारी पौंग डैम के जलस्तर कम होने पर चिंता में डूबे हैं। भाखड़ा डैम की भराव क्षमता 1690 फीट है और सोमवार को उसका स्तर 1680 फीट हो गया। यानी सिर्फ 10 फीट डैम खाली है लेकिन बीते तीन दिनों को छोड़ दें तो पौंग डैम को भरने की चिंता बीबीएमबी, पंजाब और राजस्थान के अभियंताओं को सताने लगी थी।

बीते दो दिन लगतार दो लाख से ज्यादा क्यूसेक की आवक हुई तब जाकर पौंग  डैम का जलस्तर सुधरा। अभी बेहतर स्थिति नहीं कह सकते लेकिन संतोषजनक हालात बन गए हैं। पौंग डैम 1390 से 1400 फीट तक भरा जा सकता है लेकिन दो दिन पहले 1358 फीट तक ही पानी था। यानी करीब 40 फीट डैम खाली था। जो 40 फीट खाली है था वह ऊपरी भाग था जो चौड़ा होता है।

मानसून का अब एक महीना भी शेष नहीं बचा। इसलिए राजस्थान के अभियंता परेशान होने लगे कि अगर पौंग डैम नहीं भरा तो राजस्थान को आने वाले साल में पूरा पानी कैसे दिया जाएगा लेकिन मेघ मेहरबान हुए और दो दिन में दो लाख क्यूसेक की आवक हुई और दो दिन में डैम का 16 फीट जलस्तर बढ़ गया। सोमवार को 1374 फीट पानी आ गया। अभी भी करीब न्यूनतम 16 फीट खाली है। हालात देखकर 1390 से ज्यादा पानी भरते हैं वरना सुरक्षा की दृष्टि से 1390 फीट से ज्यादा पानी डैम में नहीं लेते।

हमारे के लिए पौंग महत्वपूर्ण, भाखड़ा नहीं 

राजस्थान के लिए पौंग डैम का भरना अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी डैम से प्रदेश के 11 जिलों में पीने का पानी दिया जाता है। इसी डैम से हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर समेत चार जिलों के 14 लाख हैक्टेयर से ज्यादा इलाके की सिंचाई होती है। पश्चिमी राजस्थान की अधिकांश बिजली परियोजना, सेना, इंडस्ट्री निर्भर है। भाखड़ा डैम का असर श्रीगंगानगर को छोड़ शेष प्रदेश में कहीं नहीं होता, लेकिन पौंग डैम 11 जिलों में सीधे असर करता है और पौंग डैम का खाली रहना चिंताजनक है।

भाखड़ा की चिंता नहीं है क्योंकि वह लगभग लबालब है। इनफ्लो ज्यादा आने के कारण 50 हजार क्यूसेक पानी पंजाब में छोड़ा, लेकिन पौंग डैम की स्थिति ने चिंता में डाल दिया था। अब कुछ स्थिति सामान्य हुई है। एक बारिश और आए तब पौंग पूरी तरह भरेगा – विनोद मित्तल, मुख्य अभियंता, हनुमानगढ़