लोकायुक्त सचिव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर दो संयुक्त सचिव हाईकोर्ट पहुंचे


जयपुर. प्रदेश के विभिन्न विभागों में होने वाले भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी जिस लोकायुक्त सचिवालय पर है, उसी लोकायुक्त सचिवालय में भ्रष्टाचार को लेकर आपस में तलवारें चल रही हैं। संयुक्त सचिव आरके बंसल और बीके गुप्ता ने सचिव उमाशंकर पर खान आवंटन घोटाले के एक आरोपी अफसर और एक उद्योगपति को बचाने के लिए दबाव डालने का संगीन आरोप लगाया है।

उन्हाेंने इसकी शिकायत हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से की है। लेकिन मामले में दिलचस्प पहलू यह है कि लोकायुक्त सचिवालय के कर्मचारी सचिव उमाशंकर के पक्ष में उतर गए हैं। कर्मचारियों ने बंसल पर भ्रष्टाचार करके गलत तरीके से कार के बिल उठाने और अपने ही नौकर को लोकायुक्त में रखवाने जैसे आरोप लगाए हैं। उन्हाेंने प्रमुख सचिव से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उमाशंकर ने अफसर को बचाने की सिफारिश की : बंसल
संयुक्त सचिव आरके बंसल का कहना है- सचिव उमाशंकर ने एक अफसर और खान आवंटन जांच में फंसे एक उद्योगपति को बचाने के लिए मुझसे और संयुक्त सचिव बीके गुप्ता से सिफारिश की थी। हमने मना किया तो उमाशंकर की सिफारिश पर हमें लोकायुक्त जांचों से हटा दिया गया।
बंसल पर आरोप- अपनी ही कार संविदा पर लगाई, खुद ही ड्राइवर
लोकायुक्त सचिवालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्याम सिंह ने आरोप लगाए हैं कि संयुक्त सचिव बंसल ने गाड़ी अपने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के नाम से खरीदी। यही नहीं खुद को आने और जाने के लिए अपनी ही कार को संविदा पर लगाई। बंसल ने खुद को ही उस कार का वाहन चालक नियुक्त किया। इस मामले की जांच होनी चाहिए।
प्रमुख सचिव बोले- उमाशंकर साफ छवि के, बंसल की जांच कर रहे
प्रमुख सचिव लोकायुक्त सचिवालय  पीके जैन ने कहा कि सचिव उमाशंकर स्वच्छ छवि के व्यक्ति है। उन पर लगाए गए आरोप के बारे में जानकारी नहीं है। आरके बंसल के खिलाफ मिली शिकायत की जांच चल रही है। जहां तक संविदा कर्मी रखने का सवाल है यह तो पहले से जानने वाले व्यक्ति के बाद लगाव होता ही है।