जेहन में ‘बाहुबली’ की आवाज लेकर गए इसलिए ‘साहो’ देखकर निराश हुए दर्शक


बाहुबली’ फेम प्रभास की मेगाबजट फिल्म ‘साहो’ अपेक्षात्मक कम कमाई के कारण चर्चा में है। फिल्म की माउथ पब्लिसिटी भी बहुत खराब है। खासतौर पर प्रभास का हिंदी एक्सेंट आलोचकों के निशाने पर है। माना जा रहा है कि दर्शक ‘बाहुबली’ में उनकी डब हुई आवाज को ही जेहन में लेकर ‘साहो’ देखने गए थे। उनके एक्सेंट को लेकर हो रही आलोचना के डिफेंस में अब शरद केलकर और कमाल अहमद आ गए हैं। शरद ने ‘बाहुबली’ में प्रभास की आवाज डब की थी, जबकि कमाल अहमद ‘साहो’ में प्रभास के डिक्शन कोच रहे हैं।

मैंने हिंदी पर पूरी मेहनत की: प्रभास

प्रभास कहते हैं, “मैंने हिंदी पर पूरी मेहनत की। इसे सीखना बहुत मुश्किल नहीं था, लेकिन यह सच है कि हिंदी मेरी फर्स्ट लैंग्वेज नहीं है। मैं हिंदी लिख और पढ़ सकता हूं, पर हम घर पर हिंदी में बात नहीं करते। नतीजतन, शूट पर जाने से पहले मैंने काफी होमवर्क किया था। डायलॉग क्लासेस भी कंडक्ट करवाए गए। पहले शेड्यूल में तो चुनौतियां आईं, लेकिन दूसरे शेड्यूल से चीजें आसान होने लगीं। सेट पर डायलेक्ट कोच साथ रहा करते थे। उन्होंने कई बारीकियों से वाकिफ करवाया। भरोसा है कि आगे मेरी हिंदी के उच्चारण और स्मूद होते जाएंगे।’

क्या है शरद और कमाल का कहना

  1. मन में बसी थी ‘बाहुबली’ वाली आवाज

    शरद केलकर।

    मैंने फिल्म तो नहीं देखी है पर ट्रेलर में उनकी आवाज सुनी है। उससे मैं उनको जज नहीं कर सकता। मेरे ख्याल से इस फिल्म को देखने लोग अपने जेहन में प्रभास की वही आवाज लेकर गए होंगे जो उन्होंने ‘बाहुबली’ में सुनी थी। उनके जेहन में प्रभास की नहीं मेरी आवाज बसी थी। ऐसे में जब ‘साहो’ में उन्होंने प्रभास की ओरिजनल वॉइस सुनी तो वह उन्हें खटकी। पुराने जमाने में भी जब एक्ट्रेसेस डबिंग आर्टिस्ट की बजाय अपनी आवाज के साथ आती थीं तो लोगों को अजीब लगता था। यह लाजिमी है। मुझे भी थोड़ा सा अजीब लगा, पर उतना नहीं लगा। क्योंकि मैं पर्सनली उनको जानता हूं। मुझे पता है कि वे इसी एक्सेंट में बातें करते हैं। प्रभास के थोड़ा और एफर्ट डालना होगा।

    शरद केलकर
  2. मातृभाषा का असर तो दिखता ही है

    प्रभास बचपन से तेलंगाना में रहे। लिहाजा हिंदी के एक्सेंट में वहां की मातृभाषा का असर दिखना था। आज तक साउथ की एक्ट्रेसेस मसलन हेमा मालिनी तक की आवाज में वह टोन आती है। चूंकि वे इतने दिनों से काम कर रही हैं, इसलिए अब दर्शक उसके अभ्यस्त हो गए हैं। मराठी में नेजल एक्सेंट नहीं होता वे ‘हैं’ नहीं बोलते। वे ‘है’ बोलते रहे हैं। ऐसे ही तेलंगाना वाले ‘ह’ का उच्चारण कम करते हैं। प्रभास मेहनती हैं और वे जल्द ही अपने एक्सेंट की खामियां दूर कर लेंगे।

    कमाल अहमद
  3. क्यों हो रही आलोचना

    • डायलॉग डिलीवरी के दौरान प्रभास का साउथ इंडियन एक्सेंट उनकी हिंदी पर हावी रहा।
    • इसके साथ ही डायलॉग बोलते वक्त उनके चेहरे का एक्सप्रेशन संवाद से मिसमैच करता रहा।
  4. मार्केटिंग स्ट्रैटजी हुई बैकफायर

    प्रभास के करीबियों की मानें तो ‘साहो’ में उनसे इरादतन हिंदी बुलवाई गई, ताकि उन्हें उनकी ओरिजिनल आवाज के साथ बॉलीवुड में स्थापित किया जा सके। वहीं कहा जा रहा है कि मार्केटिंग के लिहाज से रिलीज से पहले यह ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए था कि फिल्म में प्रभास की ही ओरिजनल आवाज है। ये स्ट्रैटजी बैकफायर कर गई। उस मसले चुप्पी साधी होती तो शायद इतना हल्ला नहीं मचता।

  5. इन कलाकारों ने भी किए आवाज में बदलाव

    अपने चहेते स्टार की पर्सनालिटी और आवाज को लेकर दर्शक बड़े जज्बाती रहे हैं। पहले भी ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने स्टार्स के बदले अंदाज को एक्सेप्ट नहीं किया।

    • अमिताभ बच्चन 

    'अग्निपथ' के एक सीन में अमिताभ बच्चन।‘अग्निपथ’ में अपनी आवाज बदली थी तो लोगों ने उन्हें एक्सेप्ट नहीं किया था। बाद में फिल्म का अलग वर्जन रिलीज किया गया था।

    • मिथुन चक्रवर्ती 

    लड़ाई का पोस्टर।‘लड़ाई’ में मिथुन ने अधेड़ उम्र वाले किरदार के लिए अपनी आवाज बदली थी। उसे भी ऑडियंस ने सिरे से नकार दिया था।

    • किशोर कुमार 

    ‘प्यार किए जा’ के लिए आवाज बदलकर कॉमेडी की थी।

    • संजीव कुमार 

    ‘शोले’ में आवाज को और वजनदार बनाने के लिए लंदन जाकर डबिंग की थी।

    इसके अलावा जल्द ही आयुष्मान खुराना फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ में लड़की की आवाज निकालते नजर आएंगे। उनसे बड़ी उम्मीद की जा रही है।