जलदाय विभाग ने पानी सहित परिवहन का ठेका दिया, ठेकेदार फेल हुआ तो इंजीनियरों ने बदल दिया वर्कऑर्डर


जलदाय विभाग के इंजीनियर आम जनता की पेयजल समस्या के बजाए ठेकेदार की सुविधा के ख्याल रख रहे है। विभाग ने झोटवाड़ा में पहले प्राइवेट ट्यूबवेल से पानी खरीद कर टैंकर परिवहन का ठेका दिया। लेकिन ठेकेदार सरकारी ट्यूबवेल से पानी भरकर दोहरा फायदा लेता रहा, बाद में कॉलोनी के लोगां ने विरोध किया तो मामला खुल गया।

टेंडर की शर्तों का उल्लंघन करने के बावजूद इंजीनियरों ने कॉन्ट्रेक्टर बालाजी कंस्ट्रक्शन पर कार्रवाई के बजाए वर्कऑर्डर ही बदल दिया। अब ठेकेदार खुले तौर पर सरकारी ट्यूबवेल से पानी भर कर करधनी की टंकी में पानी परिवहन कर रहा है। जबकि प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी को सरकारी ट्यूबवेल से पानी भरने के मामले की जांच कर ठेकेदार व संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। लेकिन एक महीने बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जलदाय विभाग में इंजीनियरों की मनमर्जी के कारण आम जनता को पेयजल किल्लत झेलनी पड़ रही है। जबकि पानी सहित परिवहन का ठेका फेल होने के बावजूद ठेकेदार पर कार्रवाई करने के बजाए वर्कऑर्डर ही बदल दिया। एक्सईएन पवन अग्रवाल ने पुराने टेंडर की शर्तों में खुद के स्तर पर ही बदलाव कर दिया। इस मामले की अधीक्षण अभियंता आरसी मीना व एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी को भी जानकारी है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

ठेकेदार को नुकसान होने लगा तो बचाने का जुगाड़ 
जलदाय विभाग ने बीसलपुर बांध में पानी कम होने का बहाना करते हुए प्राइवेट ट्यूबवेल से पानी खरीद कर टैंकर सप्लाई का टेंडर दिया। यह टेंडर 50 फीसदी ज्यादा रेट पर दिया। लेकिन ठेकेदारों ने इंजीनियरों से मिलीभगत करते हुए सरकारी ट्यूबवेल से ही पानी भरते रहे। इससे ठेकेदारों ने लाखों रुपए का फर्जी भुगतान उठा लिया। झोटवाड़ा में भी बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 227 रुपए प्रति टैंकर ट्रिप में करधनी की टंकी में डालने का काम लिया। लेकिन बस स्टेंड के पास स्थित सरकारी ट्यूबवेल से पानी भरता रहा। जब कॉलोनी के लोगों ने विरोध किया तो मामला आला अफसरों तक पहुंचा। अब बालाजी कंस्ट्रक्शन को दूसरे टेंडर में 166 रुपए प्रति टैंकर ट्रिप के हिसाब से नया वर्कऑर्डर दे दिया। बताया जा रहा है कि सरकार के एक मंत्री के दबाव में ठेकेदार का बचाव किया जा रहा है।

अफसरों ने बोलने से मना किया है : एक्सईएन 
जब वर्कऑर्डर बदलने के बारे में एईएन सुनील पाराशर से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से मना कर दिया। वहीं एक्सईएन पवन अग्रवाल ने बताया कि ठेकेदार को प्राइवेट ट्यूबवेल से पानी नहीं मिल रहा है तो वो कहां से लगाएगा। हम ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकते है आला अफसरों ने कुछ भी बोलने से इंकार किया है।

कलेक्टर के आदेशों के बावजूद अधिग्रहित नहीं 
कलेक्टर जगरूपसिंह यादव ने जलदाय विभाग के इंजीनियरों को प्राइवेट ट्यूबवेल व टैंकरों को अधिग्रहित करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन इंजीनियरों ने अब तक प्राइवेट ट्यूबवेलों के जरिए दोहित हो रहे पानी की सूचना भी जिला प्रशासन को नहीं दी है। विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी की ओर से प्रमुख सचिव को भेजी जानकारी में बताया गया है कि प्राइवेट ट्यूबवेलों से पर्याप्त पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण टैंकर ठेकेदार को सरकारी ट्यूबवेल से निर्धारित नियमों के अनुसार पानी देने की अनुमति दी है। इसकी रेट भी इसी के अनुसार है। हालांकि एईएन व जेईएन की ओर से भरी हुई माप-पुस्तिका (एमबी) में प्राइवेट ट्यूबवेल से ज्यादा टैंकर भरना दर्ज हुआ है। जबकि लोगों का कहना है कि झोटवाड़ा में 10 जगह प्राइवेट ट्यूबवेलों से रोजाना 200 से ज्यादा टैंकर भर कर कालाबाजारी की जा रही है।