सनातन धर्म के लिए कौनसी पद्धति अच्छी रहेगी – जल्द पढ़े


जय सियाराम महोदय , आपने पूछा कि सनातन धर्म के लिए कौनसी पद्धति अच्छी रहेगी सो श्रीमान सनातन धर्म की तो एक ही सकारात्मक पद्धति है वो यह है कि देवाधीनं जगत सर्वं , यानि सारा संसार देवशक्तियों के आधीन है और मंत्राधीनाश्च देवता , यानि देवता मंत्रों के आधीन हैं यह सनातन धर्म का मुख्य सूत्र है दूसरा सनातन धर्म चार स्तम्भों पर टिका हुआ है 1 , देवता , 2 , द्विज यानि ब्राह्मण , संत , तपस्वी , भक्त आदि , 3 , पृथ्वी , 4 , गाय माता ये चार स्तंभ हैं सनातन धर्म के इन्हीं से धर्म की रक्षा होती है इन्हीं की रक्षा के लिए पृथ्वी पर भगवान का अवतार होता है इन चारों में मुख्य देवता हैं जब देवी देवताओं की स्थापना सकारात्मक होती है , मंत्र सही रहते हैं तो सकारात्मकता बढ़ती है अगर सही नहीं होते हैं तो नकारात्मकता बढ़ती है , मंत्रों को सही रखने का कार्य , देवी देवताओं की सही स्थापना कराने का कार्य द्विज ही कराते हैं , मंत्रों की साधना द्वारा द्विज देवताओं को अपने आधीन करते हैं तब गाय माता और पृथ्वी माता की सुरक्षा रहती है सकारात्मकता रहती है तब सर्वत्र सुख , समृद्धि , शांति स्थापित रहती है वर्तमान में अधिकांश देवी देवताओं की मूर्तियां नकारात्मक स्थापित हैं बहुत सारे शक्तिशाली मंत्र , स्तुतियाँ , अशुद्ध हैं इसकारण से सर्वत्र देव दोष है , पित्तर दोष है ।

आपने पूछा इस वर्ष ज्यादा मृत्यु होरही हैं , सो पत्रकार महोदय मृत्यु भी ज्यादा अकाल मृत्यु होरही हैं संसार में जो भी नकारात्मकता बढ़रही हैं , चाहे आतंकवाद , नक्शलवाद , भ्रष्टाचार , बलात्कार , दुर्घटाएं , चोरी , डकेतियां , रिस्वतखोरी , असाध्य रोग , अकाल मृत्यु आदि जो भी नकारात्मक कार्य हैं वो प्रकृति के मूल में जो गलत मूर्तियों , मंत्रों के कारण देवदोष है वही मूल कारण है जब तक मूर्तियों को मंत्रों को सही सकारात्मक नहीं किया जाएगा तब तक देव दोष से ये बढ़ते जाएंगे और अंत में इस नकारात्मकता का विनाश होगा जैसे राम रावण युद्ध , महाभारत युद्ध होकर विनाश हुआ था वेसे विनाश होकर फिर शांति स्थापित हो सकेगी सबसे सादर जय सियाराम आश्रम फलौदी